शुक्रवार, 1 मई 2015

मुंडे मुंडे मतिर्भिन्ना

मेरे एक मित्र ने अपने विभाग में किसी ऐसे अधिकारी के स्थान पर अतिरिक्त कार्यभार सँभाला, जो लंबी छुट्टी पर विदेश गये हुए थे। उन की अनुपस्थिति में योग्यतापूर्वक मित्र ने कार्य किया ।
वे अधिकारी महोदय वापिस आ गये और अपने पद पर फिर यथापूर्व काम करने लगे। इसके कुछ दिन बाद मेरे मित्र और उस अधिकारी की मुलाक़ात हुई। संयोगवश दो-चार अन्य साथी भी मौजूद थे। साथियों ने जब मित्र के काम की सराहना की, तो मित्र ने नम्रतापूर्वक उस अधिकारी की ओर इंगित करके कहा, "मैंने तो इनकी absence में इस तरह कार्य किया, जैसे भरत ने राम की चरण-पादुका को रख कर अयोध्या का राजकाज चलाया!"
इस पर अधिकारी महोदय बिगड़ गये। बोले, "आपका मतलब ये है कि मैं बनवास पर गया हुआ था?"

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (02-05-2015) को "सारी दुनिया का बोझ हम उठाते हैं" (चर्चा अंक-1963) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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श्रमिक दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
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JEEWANTIPS ने कहा…

Very nice post ...
Welcome to my blog on my new post.