मंगलवार, 20 जुलाई 2010

लैंग्स्टन ह्यूज़ की कविता का काव्यानुवाद

The Negro Speaks Of Rivers

I've known rivers:
I've known rivers ancient as the world and older than the
flow of human blood in human veins.

My soul has grown deep like the rivers.

I bathed in the Euphrates when dawns were young.
I built my hut near the Congo and it lulled me to sleep.
I looked upon the Nile and raised the pyramids above it.
I heard the singing of the Mississippi when Abe Lincoln
went down to New Orleans, and I've seen its muddy
bosom turn all golden in the sunset.

I've known rivers:
Ancient, dusky rivers.

My soul has grown deep like the rivers.

नदियों के बारे में नीग्रो का कहना है

नदियों को जाना है मैंने

नदियाँ जो प्राचीन बहुत हैं, उतनी जितनी अपनी दुनिया.
मानव की नस-नस में बहता रक्त नहीं था, तब भी वे थीं.
जाना है मैंने नदियों को

तभी आज अंतस में मेरे गहराई है नदियों जैसी.

मैंने यूफ्रेतिस के जल में स्नान किया था, जब सुबहें थीं नयी-नवेली.
कांगो के नज़दीक बनाई कुटिया मैंने औ'उसने था मुझे सुलाया लोरी गा कर.
मैंने नील नदी को देखा और पिरामिड उसके तट पर खड़े कर दिए.
फिर जब लिंकन न्यू और्लीन्ज़ गया तब मैंने मिसीसिपी का गीत सुना था
औ' देखा था उसका मटमैला वक्षःस्थल संध्या में हो गया सुनहला.

नदियों को जाना है मैंने
बहुत पुरानी मटमैली धूसर नदियों को

तभी आज अंतस में मेरे गहराई है नदियों जैसी.

1 टिप्पणी:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर अनुवाद किया है आपने!