सोमवार, 23 फ़रवरी 2009

विज्ञापन-संदेश

खाना पैकेट-बंद चिप्स तुम, सीधे आलू कभी चखना
बाइक से उतरे, तो पैदल चलने पर टूटेगा टखना।
इंसानों को जूतों, कपड़ों, त्वचा, केश से सदा परखना।
दृष्टिकोण चाहे जैसा हो, ब्रश का कोण ठीक ही रखना।

8 टिप्‍पणियां:

अजित वडनेरकर ने कहा…

स्वागत है आपका ...

Jyotsna Pandey ने कहा…

चिट्ठाजगत में आपका हार्दिक स्वागत है ...लेखन के लिए हार्दिक मंगल कामनाएं ..........

हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है ...

sanjaygrover ने कहा…

इंसानों को जूतों, कपड़ों, त्वचा, केश से सदा परखना।
दृष्टिकोण चाहे जैसा हो, ब्रश का कोण ठीक ही रखना।

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

रचना गौड़ ’भारती’ ने कहा…

ब्लोगिंग जगत में आपका स्वागत है।
सुन्दर रचना के लिए शुभकामनाएं।
लिखते रहिए, लिखने वालों की मनज़िल यही है।
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकून पहुंचाती है।
कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
आर्ट के लि‌ए देखें

नारदमुनि ने कहा…

very good janab, narayan narayan

नारदमुनि ने कहा…

very good janab, narayan narayan

jyoti ने कहा…

very nice n realistic poem....its really happening these days...