सोमवार, 28 सितंबर 2009

मीडिया हो या नेतागण

मीडिया हो या नेतागण -- एकसूत्री कार्यक्रम एक शे'र में (स्व० दुष्यंत कुमार से क्षमा-याचना सहित)

सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना ही मकसद है मेरा
मेरी कोशिश है कि मेरी जेब भरनी चाहिए ।

3 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

अच्छा सन्देश है।
बधाई!
ईश्वर आपकी अभिलाषा पूर्ण करें।

mahima ने कहा…

kya khoob kahaa hai uncle....aaj ki paristhitiyon par isse sateek vyangya aur kya ho sakta hai...

mahima ने कहा…

shayad dushyant kumar ji aaj zinda hote to khud hi yahi keh dena chahte