शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2009

आपस का हो प्रेम...

आपस का हो प्रेम जहाँ पर

मिलता है उल्लास वहीं ।

दीप जहाँ भी रख दोगे तुम

होगा स्वयं उजास वहीं ।

पूजन से प्रसन्न हो कर

आएँगी लक्ष्मी, मगर सुनो--

नारायण का वास जहाँ है

लक्ष्मी करती वास वहीं ।

5 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

सुन्दर पंक्तियां.

सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!

-समीर लाल ’समीर’

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आज खुशियों से धरा को जगमगाएँ!
दीप-उत्सव पर बहुत शुभ-कामनाएँ!!

समयचक्र - महेंद्र मिश्र ने कहा…

दिवाली की हार्दिक ढेरो शुभकामनाओ के साथ, आपका भविष्य उज्जवल और प्रकाशमान हो .

संगीता पुरी ने कहा…

सुंदर रचना !!
पल पल सुनहरे फूल खिले , कभी न हो कांटों का सामना !
जिंदगी आपकी खुशियों से भरी रहे , दीपावली पर हमारी यही शुभकामना !!

Dinesh Dadhichi ने कहा…

Deepawali ka parv aap sab ke liye khushiyan hi khushiyan laye--isi kamna ke saath aabhaari hoon aap sab ka.