गुरुवार, 29 अक्तूबर 2009

चमक-दमक

बाज़ारों में चमक-दमक है ।
जिधर देखिये बस रौनक है ।

नए-नए चैनल टी वी पर
हर पल रहे बदल टी वी पर ।

हर दफ्तर में मेज़ के ऊपर
रक्खा रहता है कम्प्यूटर ।

पहले तो होती थी फाइल
हाथों में अब है मोबाइल ।

बिजली की तारें ज़्यादा हैं ।
सड़कों पर कारें ज़्यादा हैं ।

पीं पीं पीं पीं पों पों पों है ।
हर कोई जल्दी में क्यों है ?

2 टिप्‍पणियां:

रानी पात्रिक ने कहा…

बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है, पर प्रश्न प्रश्न ही रह जाता है और उत्तर मिल भी जाए तो अर्थहीन लगता है। कविता सुन्दर बन पड़ी है।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सुन्दर रचना!
बधाई!