गुरुवार, 23 अप्रैल 2009

जन्म-दिवस

अपना अगला जन्म-दिवस मैं
कुछ इस तरह मनाऊंगा
घर के आँगन के कोने में
कोई पेड़ लगाऊंगा ।

घर में जो बाई आती है
उसके घर जाऊंगा मैं
खूब मिठाई उसके बच्चों
को दे कर आऊंगा मैं ।

रंगों का डिब्बा भी दूँगा
कापी, पेंसिल, पेन, किताब ।
मेरे अगले जन्म-दिवस की
ऐसी है योजना, जनाब !

3 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

जन्म दिन का काहे इन्तजार-जिस दिन यह सब कर गुजरें उसी दिन नया जन्म हुआ समझिये!!

शुभकामनाऐं.

Anil ने कहा…

दो सवाल:
पहला: उड़न तश्तरी ने जो कहा, वही क्यों न किया जाये?
दूसरा: बर्फ से इतनी खिलाफत क्यों?

Dinesh Dadhichi ने कहा…

सटीक और सार्थक टिप्पणियों के लिए आभारी हूँ. अभिप्राय वही है जो आप ने फ़रमाया. बाल-कविता में उपदेश की झलक न लगे-- इस लिए जन्म-दिवस को बात कहने का अवसर बनाया है. बर्फ़ को कृपया प्रतीक के रूप में लें . इसके अभिधात्मक अर्थ में नहीं. इसलिए पहली कविता इसी विषय में दी है. एक बार फिर आप की सहृदयता के लिए धन्यवाद u