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मंगलवार, 20 अगस्त 2013

पढ़ना-पढ़ाना

बात उन दिनों की है, जब मैं एक कॉलिज में प्राध्यापक था. छात्रों की किसी हड़ताल आदि के दिनों में मुझे एक दिन गेट पर एक पुलिस वाले ने विद्यार्थी समझ कर रोक लिया.

मैंने उसे बताया कि मैं प्राध्यापक हूँ और इस कॉलिज में बच्चों को पढाता हूँ. उसने ऊपर से नीचे तक मुझे ध्यान से देखा और कहने लगा: "आप अगर पढ़ाते हैं, तो फिर ये किताबें हाथ में क्यों पकड़ी हुई हैं?"

ज़ाहिर है, उसका मतलब ये था कि पढ़ने का काम पूरा करके ही तो पढ़ाया जाता है!