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बुधवार, 12 दिसंबर 2012

शुक्र है .....

शुक्र है कि बच्चे अभी लड़ते हैं
वे खूब गुस्सा करते हैं
आपस में ही नहीं, माँ-बाप से भी
दूसरों से ही नहीं, अपने आप से भी
उन्हें गुस्सा आता है
अंदर से निकलता है,
चेहरे पर बिखर जाता है
आँखों में, हाथों में
साफ़ दिख जाता है.

कितनी खुशी की बात है
कि हमारे नन्हे-मुन्ने
नहीं होते हमारी तरह
समझौता-परस्त
शातिर, काइयाँ और घुन्ने!

सोमवार, 7 दिसंबर 2009

अंतराल

मेरे पुरखे कितने विवश और असहाय
रहे होंगे
उन्हें इस प्यारी धरती को
मेरे हवाले कर के आखिर जाना पड़ा .
मेरे बच्चों के बच्चे
कितने विवश और असहाय होंगे
कैसी धरती होगी
जिसे मैं उनके हवाले कर के जाऊँगा !
इस अंतराल में कोई विवश और असहाय नहीं है
तो वह मैं हूँ !

शुक्रवार, 13 नवंबर 2009

कवच नहीं बन सके...

कवच नहीं बन सके डिठौने बच्चों के ।
काँटों से भर गए बिछौने बच्चों के ।

दुगनी लगन काम की, तिगुना लाभ मिले,
दाम मजूरी के हैं पौने बच्चों के ।

दुनियादारी की इन ऊँची बातों से
सपने हो जायेंगे बौने बच्चों के ।

बन कर कल असलियत सामने आएँगी,
बंदूकें हैं आज खिलौने बच्चों के !