क्यों अंतर्मन में इक उजास-सा लगता है
क्यों आज भली लगती है हर इक बात हमें ?
है और दिनों जैसा ही यह सुन्दर विहान
फिर क्यों विशेष लगता है यही प्रभात हमें ?
जिस बीते कल की उथल-पुथल से गुज़रे हैं
उसके सब सबक हमें रस्ता दिखलायेंगे ।
यह बात खास है नये वर्ष की वेला में
हम ज्यादा हिम्मत से अब कदम बढ़ाएँगे ।
हम नित्य नवीन दिशाओं का संधान करें
निर्भय हो कर अपने पथ पर बढ़ते जाएँ ।
हर सुन्दर सपना हो अंकुरित बने बिरवा
पल्लवित और पुष्पित हों मन की आशाएँ ।
सौभाग्य हमारा मार्ग प्रशस्त बनाएगा
जब नेक इरादों से मेहनत में रत होंगे ।
खुद अपना ही विवेक, साहस, विश्वास यहाँ
हर कठिनाई में हम सब की ताकत होंगे ।
आसान नहीं हैं चुनौतियाँ इस जीवन की
पर हमने सदा धैर्य से उन्हें हराया है ।
बस, यही स्मरण करवाने की खातिर शायद
इस नये वर्ष का सूरज यूं मुस्काया है !