आज वैलेंटाइन डे है, सो यह प्रेम कविता गृहिणी के लिए, जिस के बारे में कवि अक्सर कुछ नहीं कहते. वह केवल हास्य-कविताओं में स्थान पाती है .
जादू की तरह मौजूद रहती है वह घर में
जादू से कम नहीं होते उसके कारनामे.
चीज़ों को जिद रहती है
टूटने की, फटने की,
बिखरने और गुम होने की.
और वह ऐसा होने नहीं देती.
चीज़ों की बेतुकी ज़िद के ख़िलाफ़
जम कर टक्कर लेती है .
जादू से कम नहीं उसका इस घर में होना
उसके होने के सबूत बार-बार देता है
इस छोटे-से घर का कोना-कोना !