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गुरुवार, 18 जुलाई 2013

श्रेय में हिस्सेदारी

आखिरकार सुबह हुई, तो वाटिका में फूल खिल उठे; परिंदे चहचहाने लगे.

बहुत कृपा हुई मुर्गे की, जिसने बांग दी थी.

और सूर्य देवता?

हाँ, उन्हें भी धन्यवाद है!

सोमवार, 5 अक्टूबर 2009

आदरणीय चोर

पहले चोर जादू नहीं जानते थे
सेंध लगाने की पूरी मशक्कत
मजबूरन उन्हें करनी पड़ती थी ।
हमारी अनुपस्थिति में वे आते थे
या हम सो रहे होते थे
तभी वे अपना कार्यक्रम बनाते थे ।
जब हम जाग जाया करते,
तो वे भाग जाया करते थे ।
अब हम देख रहे होते हैं
और वे हमसे हँसते-बतियाते
खुल कर हम को लतियाते हैं
चोर बिल्कुल नहीं कहलाते हैं ।
हम कसम खा कर कहते हैं
कि ये आदरणीय हैं
ये जो हमारे घर में बैठ कर
फैलते-पसरते हैं
ये जो भी करते हैं
उसमें बिल्कुल नहीं डरते हैं ।

देखो देखो कैसे सामान समेटा है
वाह-वाह क्या खूब
गठरी में बाँधने से पहले लपेटा है ।

अब चोर जादूगर होते हैं
तभी तो हम
समझदारी के नाम पर
उनकी दी हुई भ्रांतियों को ढोते हैं !

सोमवार, 28 सितंबर 2009

मीडिया हो या नेतागण

मीडिया हो या नेतागण -- एकसूत्री कार्यक्रम एक शे'र में (स्व० दुष्यंत कुमार से क्षमा-याचना सहित)

सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना ही मकसद है मेरा
मेरी कोशिश है कि मेरी जेब भरनी चाहिए ।

शुक्रवार, 11 सितंबर 2009

ऐसा क्यों होता है कि....

अगर अंग्रेज़ी का अध्यापक हिन्दी में हस्ताक्षर करे, तो सब चकित हो कर पूछते हैं , "क्यों?" पर हिन्दी का अध्यापक अगर अंग्रेज़ी में हस्ताक्षर करे, तो कोई चकित नहीं होता ? शायद हिन्दी में हस्ताक्षर करना वैसा ही है, जैसा अंगूठा लगाना । हिन्दी दिवस पर ज़रा विचार करें ।

बुधवार, 29 जुलाई 2009

ऐसा क्यों होता है कि.....

जब कोई अंग्रेजी लिखने या बोलने में ग़लती करता है, तो इसमें उसका दोष समझा जाता है, लेकिन जब कोई हिन्दी लिखने या बोलने में ग़लती करता है, तो इसमें दोष उस व्यक्ति का नहीं, बल्कि हिन्दी का समझा जाता है ! अंग्रेजी लहजे में ग़लत हिन्दी बोलने से आपका सामाजिक स्तर ऊँचा समझे जाने की सम्भावना ज़्यादा है, लेकिन जैसे ही आप अंग्रेज़ी को हिन्दी लहजे में बोलने की ग़लती करेंगे, आपका सामाजिक स्तर तुरन्त गिर जायेगा । वैसे सबसे अच्छा तो यही होगा कि आप हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों को ही बोलने में गलतियाँ करें। इस से आपको किसी टी वी चैनल पर काम मिलने की पूरी सम्भावना है। लिखने में गलतियाँ होती हों, तो अख़बार के लिए संवाद दाता का काम आप को आसानी से मिल जाएगा ।

रविवार, 12 जुलाई 2009

गौर से देखे कोई

उनके सुख-दुख में बनावट आपकी शामिल रही है ।
उनके दिल की राह ही बस आपकी मंज़िल रही है ।
गौर से देखे कोई तो साफ़ देखी जा सकेगी,
लुप्त कब की हो चुकी पर आपकी दुम हिल रही है ।